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Jain Philosophy: Height of Human Being

 जैन शास्त्रों अनुसार ६ युग उत्सर्पिणी के और ६ युग अवसर्पिणीकाल के मिलकर एक कालचक्र कहलाता है।इस पृथ्वी पर इसप्रकार अनंत कालचक्र हुए हैं।


वर्तमान काल में अवसर्पिणी काल का पांचवां युग चल रहा है।

अवसर्पिणीकाल में मनुष्यों और जानवरों के आकार,आयु,बुद्धि,शक्ति पहले के ४ युगों में काफी विशाल होती हैं जो धीरे-धीरे कम होती चली जाती हैं।


जैन धर्म अनुसार प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की हाइट 1500 मीटर और आयु 84 लाख पुर्व थी,

जो घटते क्रम में चोथे युग के खत्म होने तक ,24 वे अंतिम तीर्थंकर महावीरस्वामी की हाइट लगभग 7 हाथ और उम्र 72 वर्ष थी।


जैन प्राचीन जीवाभिगम सुत्र में मनुष्यो के विशाल आकार के साथ 1 किलोमीटर जितने बड़े सांपों का भी जिक्र है।

 आधुनिक विज्ञान भी जैन शास्त्रों में लिखी बातों को 100% सत्य मानता है,इसके लिए कई प्रमाण आज मौजूद है।

1-   6.5 करोड़ वर्ष प्राचीन डायनासोर के फॉसिल्स(अवशेष) इस बात को सच साबित करते हैं,वास्तव में डायनासोर उस वक्त के लोगों के साथ रहने वाले साधारण पक्षी या सरीसृप के तरह ही होते थे,लेकिन वर्तमान काल में मनुष्यों का आकार छोटा हो जाने से उनके फोसिल्स हमें विशालकाय लगते हैं।


2- अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में  विशालकाय मछलियों के फॉसिल्स मिले हैं ( यह रेगिस्तान पहले समुंदर रहा होगा )


3- साउथ अमेरिका महाद्वीप के पेरू देश में एक-एक मीटर की ऊंचाई की अत्यंत विशाल सीढ़ियां मिली है।


4- इजिप्ट के विशालकाय पिरामिड-40 से 45 टन वजन के 10-10 फिट उंचे कुल 23 लाख पत्थरों को मात्र 6 हजार साल पहले बिना क्रेन की सहायता से 450 फिट की ऊंचाई पर रखना असंभव है।

वास्तव में ये पिरामिड लाखों साल पुराने है। 

अंटार्कटिका में भी बर्फ से ढके हुए तीन बड़े-बड़े मानव निर्मित विशालकाय पिरामिड मिले हैं।जो यह बात सत्य साबित करते है कि लाखों वर्ष पहले अंटार्कटिका में बर्फ नहीं थी,बल्कि वह हरा-भरा प्रदेश था,जहां मानव सभ्यता सुविकसित थी।


5-बलुचिस्तान से गुजरात के नर्मदा तट तक सिंधु-सभ्यता के अवशेष मिले हैं उनमें भी यही सिद्ध होता है कि वे नहर, शौचालय आदि सभी बनाते थे, नहरों के लिए चारकोल और जिप्सम लगी हुई ईटों का उपयोग करते थे,ताकि नहरो की ईंटों में जंग लगकर वे खराब ना हो। सिंधु सभ्यता के अवशेषों से भी यही सिद्ध होता है कि प्राचीनकाल में विश्व में एक सुसभ्य सुविकसित सभ्यता थी।


6-  1941 में भारत के कुरूक्षेत्र और क्लोरोडा(अमेरिका) के रेगिस्तान में 9 फुट लंबे मनुष्य के स्केलेटन मिले हैं।


जैन शास्त्रों में 5 करोड़ मुनियों के संग वृषभसेन(पुंडरीक) गणधर के शत्रुंजय तीर्थाधिराज से मोक्ष प्राप्ति का वर्णन मिलता है।

 साधारण मनुष्य के मस्तिष्क में यह विचार आ सकता है कि 5 करोड मुनि एक छोटे से पर्वत पर एक साथ कैसे समा सकते हैं?

इसका उत्तर भी हमें जैन शास्त्रों से ही मिलता है कि लाखों वर्षों पहले गीरनार पर्वत भी शत्रुंजय पर्वत का ही एक भाग था और शत्रुंजय बहुत ही विशालकाय पर्वत था।

पर्वतों में विघटन की बात सबसे पहले जैन शास्त्रों में ही लिखी मिलती है।


जैन शास्त्रों में अयोध्या को ही प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव और बाकि के भी कई तीर्थंकरों की राज्यभूमि माना है।

साधारण व्यक्ति के मस्तिष्क में यह विचार भी आ सकता है कि इतने सारे लोगों के लिए छोटी सी अयोध्या नगरी में खाने-पीने की व्यवस्था कैसे हो सकती थी?

इस प्रश्न का उत्तर भी हमें जैन शास्त्रों से ही मिलता है कि पहले के लोग काफी संयमी होते थे,दिन में मात्र एक बार अल्पाहार खाने पर भी उन्हें भूख नहीं लगती थी फिर भी उनके शरीर का बल कई गुना ज्यादा होता था,

 पहले अयोध्या भी काफी विशाल नगरी थी,जिसप्रकार द्वारिकानगरी अरबसागर में लुप्त हो चुकी है,उसीप्रकार उस वक्त भी पृथ्वी मे ज्यादा भाग जमीन और थोड़ा ही भाग समुंद्री पानी था।

 वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी के टेक्टोनिक प्लेट के आपस में टकराने से पर्वतों की जगह समुंदर और समुंदर की जगह रेगिस्तान बन गये है, इसप्रकार पृथ्वी में कई बदलाव आए हैं।


हजारों लाखों साल पूर्व जलवायु और भूगोल में परिवर्तन होने से कई प्राचीन नगर विलुप्त हो चुके हैं जिनके अवशेष हमें अभी मिल रहे हैं जिनके नाम है-


1-Sunken city of Pavlopetri (प्राचीन ग्रीस)

2-Yonaguni Jima(जापानी एटलांटिस)

3-The submerged castle in lake van(टुर्की)

4-Mahabalipura (भारत)

5-the lost city of Cleopatra(Heracleion इजिप्ट)

6-The anicient underwater city in fuxian lake(चीन)

7-Port royal lost city (जैमैका) 

और भी कई विलुप्त नगरों के अवशेष मिले हैं।


आज वैज्ञानिक विश्व के 6 खंड(महाद्वीप) मानते हैं और प्राचीन जैनशास्त्रों में भी चक्रवर्ती द्वारा विश्व के 6 खंडों में विजय की बात कही गई है।

ये ६ खंडो के आधुनिक नाम है-

1-उत्तरी अमेरिका

2-दक्षिण अमेरिका

3-अफ्रिका

4-अंटार्कटिका 

5-ऑस्ट्रेलिया

6- युरोप+एशिया


वैज्ञानिक मानते थे कि धरती पर मनुष्य की उत्पत्ति मात्र 1 लाख वर्ष पूर्व हुई है, लेकिन चाइना में फॉसिल्स की खुदाई के दौरान 16 इंच चौड़े मेटल के सैंकड़ों baigong पाइप मिले है जिनकी कार्बन डेटिंग "डेढ़ लाख साल" बताई जा रही है।

 वैज्ञानिक हैरान है कि मनुष्य की उत्पति से पूर्व इन मैटल के पाइपों को किसने और क्यों बनाया होगा?


वैज्ञानिक मानते थे कि पहिये का आविष्कार आदिमानव ने किया होगा, लेकिन जैन शास्त्रों में भरत चक्रवर्ती के रथ और सुदर्शन चक्र की बातें लिखी मिलती है।

"जैन श्रीपालराजा रास" जिसमे लाखों वर्ष पुर्व की कथा है, उसमें भी गुजरात के भरूच बंदरगाह से जहाजों द्वारा अन्य देशों में बिजनेस की बातें लिखी है।


इतना ही नहीं प्राचीन भारतीय मुनियो और ऋषियों के पुस्तकों को पढ़कर कई आधुनिक अविष्कार हुए हैं, जिन्हें हम अगले लेख में पढ़ेंगे।

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